बजट 2026: क्या यह केवल आंकड़ों का जाल है या आम आदमी की उम्मीदों का पुल?
(राजन वार्ष्णेय एडवोकेट )

संसद के गलियारों में आज जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना बजट भाषण पढ़ रही थीं, तो पूरे देश की नजरें इस बात पर टिकी थीं कि क्या सरकार ‘चुनावी मोड’ से बाहर निकलकर ‘स्थिरता’ और ‘सुधार’ के उस रास्ते पर चलेगी, जिसकी उम्मीद एक मध्यम वर्ग और उद्योग जगत लंबे समय से कर रहा था।
आज पेश हुआ बजट 2026-27 यह साफ संकेत देता है कि सरकार अब केवल “राहत” देने के बजाय “क्षमता निर्माण” (Capacity Building) पर दांव खेल रही है।
1. टैक्स का नया ढांचा: सरलीकरण या एक और पहेली?
बजट की सबसे बड़ी सुगबुगाहट ‘इनकम टैक्स एक्ट 1961’ को बदलकर ‘नया आयकर अधिनियम 2025’ लाने की रही। सरकार का दावा है कि यह नया कानून टैक्सपेयर्स के लिए अनुपालन (compliance) को आसान बनाएगा।
हालांकि, शेयर बाजार के निवेशकों के लिए खबर थोड़ी कड़वी रही। STT (Securities Transaction Tax) में वृद्धि का फैसला यह बताता है कि सरकार बाजार में हो रही अत्यधिक सट्टेबाजी (Speculation) पर लगाम लगाना चाहती है। मध्यम वर्ग के लिए राहत की बात यह है कि विदेशी शिक्षा और इलाज के लिए भेजे जाने वाले पैसे पर TCS की दरों में कटौती की गई है, जो सीधे तौर पर मध्यम वर्ग की जेब में थोड़ी बचत छोड़ेगा।
2. बुनियादी ढांचा: अब बड़े शहरों से आगे की सोच
सरकार ने बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के लिए ₹12.2 लाख करोड़ का जो आवंटन किया है, वह यह दर्शाता है कि ‘गतिशक्ति’ का पहिया अब और तेजी से घूमेगा। लेकिन इस बार का ध्यान केवल दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों तक सीमित नहीं है। अब सरकार का फोकस टियर-2 और टियर-3 शहरों पर है। इन छोटे शहरों में अर्बन प्लानिंग और हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी को प्राथमिकता देना भारत के शहरीकरण के अगले चरण की तैयारी है।
3. ‘बायोफार्मा’ और स्वास्थ्य: आपदा से सबक
पिछले कुछ वर्षों के अनुभवों से सीखते हुए, सरकार ने ‘बायोफार्मा शक्ति’ के नाम से एक नई दिशा चुनी है। ₹10,000 करोड़ का यह निवेश न केवल दवाओं के निर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ाएगा, बल्कि यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में किसी भी स्वास्थ्य संकट के लिए हमारी दवा कंपनियां पहले से तैयार हों।
4. युवाओं के लिए क्या है खास?
शिक्षा और स्किलिंग के क्षेत्र में सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और AI प्रशिक्षण पर जोर देना भविष्य की जरूरतों को दर्शाता है। लेकिन असली चुनौती इन योजनाओं के क्रियान्वयन (Implementation) की है। क्या ये ट्रेनिंग प्रोग्राम वाकई में युवाओं को ‘रोजगार योग्य’ (Employable) बना पाएंगे? यह एक बड़ा सवाल है।
निष्कर्ष: संतुलित लेकिन चुनौतीपूर्ण
कुल मिलाकर, यह बजट एक ऐसी संतुलित रेखा खींचने की कोशिश करता है जहाँ एक तरफ राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को 4.3% पर रखकर वैश्विक निवेशकों को भरोसा दिया गया है, तो दूसरी तरफ बुनियादी ढांचे पर खर्च कर घरेलू मांग को बढ़ाने की कोशिश की गई है।
यह बजट किसी ‘जादुई छड़ी’ जैसा तो नहीं है, लेकिन अगर इसके प्रावधानों को सही ढंग से जमीन पर उतारा गया, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती देने का दमखम जरूर रखता है।
