- अलीगढ़ महोत्सव: वंदना मिश्रा की सुरीली तान पर झूम उठा अलीगढ़, लोकगीतों ने बांधा समां

अलीगढ़, 1 फरवरी : अलीगढ़ महोत्सव की आज की शाम सुरों और तालों के नाम रही। लखनऊ से आईं प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय लोक गायिका वंदना मिश्रा ने अपनी जादुई आवाज से लाखों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके लोकगीतों और सूफी कलामों ने महोत्सव में मौजूद जनसमूह को थिरकने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत वंदना मिश्रा ने पारंपरिक अंदाज में की और जैसे-जैसे शाम ढली, उनकी प्रस्तुतियों ने माहौल में रंग जमा दिया। उन्होंने अमीर खुसरो की कालजयी रचना “छाप तिलक सब छीनी” और सूफी गीत “दमा दम मस्त कलंदर” गाकर श्रोताओं में जोश भर दिया। इसके अलीगढ़ महोत्सव: वंदना मिश्रा की सुरीली तान पर झूम उठा अलीगढ़, लोकगीतों ने बांधा समां
अलीगढ़, 1 फरवरी : अलीगढ़ महोत्सव की आज की शाम सुरों और तालों के नाम रही। लखनऊ से आईं प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय लोक गायिका वंदना मिश्रा ने अपनी जादुई आवाज से लाखों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके लोकगीतों और सूफी कलामों ने महोत्सव में मौजूद जनसमूह को थिरकने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत वंदना मिश्रा ने पारंपरिक अंदाज में की और जैसे-जैसे शाम ढली, उनकी प्रस्तुतियों ने माहौल में रंग जमा दिया। उन्होंने अमीर खुसरो की कालजयी रचना “छाप तिलक सब छीनी” और सूफी गीत “दमा दम मस्त कलंदर” गाकर श्रोताओं में जोश भर दिया। इसके पश्चात, “मैं तो जोगन बन गई” और “मोहे लागी श्याम संग प्रीत” जैसे भक्तिमय गीतों ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
जैसे ही उन्होंने अवध की प्रसिद्ध होली “होली खेले रघुबीरा” की तान छेड़ी, पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। लाखों की संख्या में मौजूद दर्शकों ने वंदना मिश्रा की गायकी का जोरदार स्वागत किया और देर तक अपनी जगह पर खड़े होकर उनका उत्साहवर्धन किया।
वंदना मिश्रा की इस प्रस्तुति ने अलीगढ़ महोत्सव की सांस्कृतिक गरिमा में चार चांद लगा दिए। उनकी गायकी में लखनऊ की नजाकत और लोक संस्कृति की मिठास साफ झलक रही थी, जिसने आज की शाम को यादगार बना दिया।, “मैं तो जोगन बन गई” और “मोहे लागी श्याम संग प्रीत” जैसे भक्तिमय गीतों ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
जैसे ही उन्होंने अवध की प्रसिद्ध होली “होली खेले रघुबीरा” की तान छेड़ी, पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। लाखों की संख्या में मौजूद दर्शकों ने वंदना मिश्रा की गायकी का जोरदार स्वागत किया और देर तक अपनी जगह पर खड़े होकर उनका उत्साहवर्धन किया।
वंदना मिश्रा की इस प्रस्तुति ने अलीगढ़ महोत्सव की सांस्कृतिक गरिमा में चार चांद लगा दिए। उनकी गायकी में लखनऊ की नजाकत और लोक संस्कृति की मिठास साफ झलक रही थी, जिसने आज की शाम को यादगार बना दिया।
अलीगढ़ महोत्सव: वंदना मिश्रा की सुरीली तान पर झूम उठा अलीगढ़, लोकगीतों ने बांधा समां
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