POSH Act: सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल की ओर एक सशक्त कदम
(भूमिका वार्ष्णेय एडवोकेट )
दिल्ली :आज के समय में महिलाएँ हर क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। कॉर्पोरेट ऑफिस, फैक्ट्री, अस्पताल, स्कूल, फील्डवर्क- कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं जहाँ महिलाओं की भागीदारी न हो। वे पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं और संगठन की प्रगति में अहम योगदान दे रही हैं। लेकिन एक महत्वपूर्ण प्रश्न आज भी हमारे सामने खड़ा है- ‘क्या हर महिला अपने कार्यस्थल पर सुरक्षित और सम्मानित महसूस करती है?’ दुर्भाग्यवश, इसका उत्तर हमेशा सकारात्मक नहीं होता।कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न केवल शारीरिक कृत्य तक सीमित नहीं है। अशोभनीय टिप्पणियाँ, घूरकर देखना, अनुचित संदेश भेजना, अवांछित स्पर्श, या पद और अधिकार का दुरुपयोग- ये सभी यौन उत्पीड़न के दायरे में आते हैं। कई बार महिलाएँ बदनामी के डर, करियर पर नकारात्मक प्रभाव या सामाजिक दबाव के कारण इन घटनाओं को सहन कर लेती हैं और चुप रह जाती हैं। यही चुप्पी महिलाओं के आत्मसम्मान और मानसिक स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित करती है।इसी चुप्पी को तोड़ने और महिलाओं को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीडन की रोकथाम अधिनियम, 2013 (POSH Act) लागू किया गया। यह कानून महिलाओं को अपनी आवाज़ उठाने का अधिकार देता है और यह विश्वास दिलाता है कि उनकी शिकायत को गंभीरता और निष्पक्षता से सुना जाएगा।
POSH अधिनियम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को एक सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त कार्यस्थल उपलब्ध कराना है। यह कानून प्रत्येक संगठन को यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य करता है कि वहाँ आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee ICC) का गठन हो। यह समिति महिलाओं को बिना डर अपनी शिकायत दर्ज कराने का मंच प्रदान करती है और निष्पक्ष जांच के माध्यम से न्याय सुनिश्चित करती है।यह अधिनियम केवल कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि नियोक्ताओं की जिम्मेदारियाँ भी स्पष्ट रूप से निर्धारित करता है। नियमित जागरूकता कार्यक्रम, POSH ट्रेनिंग, समयबद्ध शिकायत निवारण और गोपनीयता बनाए रखना- ये सभी एक स्वस्थ और सकारात्मक कार्यसंस्कृति के निर्माण में सहायक होते हैं।
POSH Act हमें यह भी सिखाता है कि सम्मान केवल कानून का विषय नहीं है, बल्कि व्यवहार का भी है। कभी-कभी एक हल्की-सी असंवेदनशील टिप्पणी या मजाक भी किसी व्यक्ति के आत्मसम्मान को गहरी ठेस पहुँचा सकता है। इसलिए यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम अपने शब्दों, दृष्टिकोण और व्यवहार में संवेदनशीलता और सम्मान बनाए रखें।एक सुरक्षित कार्यस्थल केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे संगठन के लिए लाभकारी होता है। जहाँ सम्मान होता है, वहाँ विश्वास पनपता है। और जहाँ विश्वास होता है, वहाँ कर्मचारी बेहतर प्रदर्शन करते हैं, संगठन विकसित होता है और कार्यस्थल एक सकारात्मक वातावरण में बदल जाता है।
अंततःPOSH Act को केवल एक कानूनी प्रावधान के रूप में नहीं, बल्कि सम्मान, समानता और गरिमा की दिशा में एक सशक्त कदम के रूप में देखा जाना चाहिए।
आइए, हम सभी मिलकर यह सुनिश्चित करें कि हमारा कार्यस्थल ऐसा हो जहाँ हर महिला बिना भय, पूरे आत्मविश्वास और सम्मान के साथ अपने सपनों को साकार कर सके।क्योंकि जब महिलाएँ सुरक्षित होंगी,तभी वे सशक्त होंगी,और तभी हमारा समाज और देश सच्चे अर्थों में आगे बढ़ेगा।
