उप-पंजीयक कार्यालय बना आंदोलन का केंद्र, 18 जून तक हड़ताल जारी

हाथरस /सिकन्द्राराऊ। रजिस्ट्री कार्यालयों के निजीकरण के प्रस्ताव के विरोध में चल रहा अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं टाइपिस्टों का आंदोलन सोमवार को छठे दिन भी जारी रहा। उप-पंजीयक कार्यालय परिसर आंदोलन का केंद्र बना रहा, जहां प्रदर्शनकारियों ने धरना देकर और कलमबंद हड़ताल कर सरकार की प्रस्तावित नीति के प्रति अपना विरोध व्यक्त किया।
धरना स्थल पर आयोजित आपात बैठक में आंदोलन की आगामी दिशा पर मंथन किया गया। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता डी.के. चौहान ‘शोला’ ने की तथा संचालन जय प्रकाश गुप्ता एडवोकेट ने किया। बैठक में मौजूद सभी वर्गों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि निबंधन सेवाओं का निजीकरण न केवल हजारों लोगों की आजीविका पर असर डालेगा, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी नई परेशानियां खड़ी कर सकता है।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सरकार द्वारा प्रस्ताव वापस लिए जाने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा तथा 18 जून तक कलमबंद हड़ताल जारी रहेगी। वक्ताओं ने कहा कि निबंधन व्यवस्था जनता से सीधे जुड़ी सेवा है, इसलिए इसे निजी हाथों में सौंपना जनहित के अनुकूल नहीं माना जा सकता।
आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की कि रोजगार सुरक्षा, पारदर्शिता और जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए निजीकरण संबंधी प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।
धरना-प्रदर्शन में अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं टाइपिस्टों की बड़ी संख्या मौजूद रही। सभी ने एकजुट होकर संघर्ष को अंतिम निर्णय तक जारी रखने का संकल्प दोहराया।

